Inspirational Crime And Suspense Story in Hindi

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  प्रस्तावना  "बचपन" एक ऐसा पर्व जिसे हर कोई अपनी जिंदगी मे जीता है. "बचपन" एक ऐसा पर्व जिसमे हर किसी के भविष्य की निव रखी जाती है. इसलिये हमारे घर के बच्चों के बचपन का खयाल रखने की प्रमुख जिम्मेदारी उनके माता पिता की होती है. बचपन मे बच्चों के आसपास घटित होने वाली हर घटना का प्रत्यक्षरूप से असर बच्चों के जिंदगी पर पडता रहता है. अगर अच्छी घटनाए घटित हो तो उसका अच्छा असर और अगर बुरी घटनाए घटित हो तो उसका बुरा असर बच्चों के जिंदगी पर पडता दिखाई देता है. इसलिये अपने बच्चों के आसपास घटित हो रही घटना ओंकी जानकारी रखना हर माता पिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है… साथ ही अपने बच्चों को अच्छे माहोल मे रखने की जिम्मेदारी भी उनके माता पिता की हो जाती है.  बच्चों का अच्छा भविष्य निर्मित करने मे सबसे बडी भुमिका बच्चों को उनके माता पिता के द्वारा दिये गये संस्कारों की होती है और अगर इस काम मे माता पिता से चूक हो जाये तो उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है. मैने अपने इस किताब से यही बात समझाने का प्रयास किया है. हम बहोत बार अपने बच्चों की गलतियों को छोटा समझकर नजर अंदा...

TRIPLE TALAQ - Indian Muslim Community Issue


         ट्रिपल तलाक कानून का क्यों विरोध करते है मुसलमान?


"ट्रिपल तलाक कानून" एक ऐसा कानून जिसने मुस्लिम औरतों को सम्मान और सुरक्षा देने का काम किया… एक ऐसा कानून जिसने गैर इस्लामिक मुसलमानों के द्वारा मासूम मुस्लिम औरतों पर होने वाले शोषण को अंकुश मे रखकर उस शोषण को रोखने का कार्य किया...एक ऐसा कानून जिसने कट्टर और गैर इस्लामिक मुसलमानों के खिलाफ आवाज उठाकर अपना हक मांगने का सही अधिकार दिया….

ऐसे कानून का तथा कथित मुस्लिम बुद्धीजीवी और मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा विरोध किया गया. साथ मे मासूम और अनपढ गरीब मुसलमानों को कानून का डर दिखाकर उनके द्वारा भी विरोध करवाया गया. मै उन लोगों से सवाल करना चाहता हूँ के आखिर ऐसा क्या गलत है इस कानून मे?

*आखिर क्यों ये कट्टर गैर इस्लामिक लोग मुस्लिम औरतों को समान अधिकार देना नहीं चाहते?

*आखिर क्यों ये लोग मुस्लिम औरतों को दबाकर रखना चाहते है?

हर पढा लिखा और समझदार मुसलमान इस कानून के महत्वता को समझता है और इस कानून का दिल से स्वागत करता है. पर इन कट्टर और गैर इस्लामिक सोच के मुसलमानों के दबाव की वजह से हमारे देश के बहोत सारे मुसलमान इस कानून का खुले दिल से समर्थन नहीं कर पाते. शादी को मजाक बनाके रख दिया है इस तरह के सोच के मुस्लिमों ने.


      खाने मे नमक कम होने से खाने का स्वाद कम हो गया, तो तुरंत ही बोल दिया तलाक… तलाक… तलाक…..

पत्नी बच्चा पैदा ना करे, तो तुरंत ही बोल दिया तलाक… तलाक… तलाक….

पत्नी के ससुराल से दहेज नहीं मिला, तो बोल दिया तलाक… तलाक… तलाक…..

पत्नी बाहर से घर देरी से आ गयी, तो बोल दिया तलाक... तलाक… तलाक….

इस तरह के कही सारे अजीब और बेबूनियाद वजहों के चलते मुस्लिम औरतों को घर से निकाल दिया जाता था. एक महिला जो अपना घर छोडकर, यहाँ तक की अपने पिता के नाम को छोडकर किसी के घर जाती है….. उस महिला को इस तरह से घर से निकाल देना कहा तक सही है. इस तरह की अमानवीय और महिला सम्मान विरोधी प्रथा को खतम करने के लिये ट्रिपल तलाक कानून बनाया गया….और ये तथा कथात कट्टर और गैर इस्लामिक मुस्लिम लोग इस्लाम को बचाने का हवाला देते हुए इस कानून का विरोध करने लग जाते है. कुराण मे कहा और किस आयत मे लिखा गया है के इस तरह से मुस्लिम औरतों का दमन किया जाये. शर्म आती है मेरे जैसे कही मुसलमानों को जब हमारे मुस्लिम भाई इस तरह के गैर इस्लामिक बातों का समर्थन करते है.




        भारत सरकार द्वारा बनाये गये इस कानून को रोखने के लिये खुद को सारे भारतीय मुसलमानों का रहनुमा समझने वाले "ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड" की तरफ से एक याचिका दाखिल की जाती है. जिसमे इस कानून को रोखने के लिये 3 कारण बतायें जाते है. 

      इनमे से एक देलिल मे यह बताया गया कि मुस्लिम महिला ओंके मुकाबले मुस्लिम पुरुषो की सोचने कि क्षमता अधिक होती है. इसलिये निर्णय लेने का अधिकार मुस्लिम पुरुषो के पास ही होना चाहिये… इसका मतलब यह है शादी जैसे पवित्र रिश्ते को समाप्त करने का निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ मुस्लिम पुरुषो के पास ही होना चाहिये. इनके इस दलिलों के हिसाब से ये लोग मुस्लिम औरतों को बुद्धिहीन और कमजोर समझते है. पता नहीं इन लोगों ने कौन सा इस्लाम पढा है. इनकी इन दलिलों को पढा लिखा और समझदार मुस्लिम पुरी तरह शर्मनाक और निंदनीय मानता है. हमारे इस्लाम मे औरतों को समान अधिकार दिया गया है. जिसे हम सब मानते है.

बहोत सारे कट्टर मुस्लिम भाइयों ने ये कहा के हम सरकार को हमारे धर्म मे हस्तक्षेप करने नहीं देंगे. ट्रिपल तलाक हमारे धर्म की समस्या है और हम ही उसका समाधान करेंगे….मै एक सच्चा और देशभक्त मुसलमान होने के कारण मेरे इस तरह के कट्टर और गैर इस्लामिक मुस्लिम भाई ओंको ये बताना चाहता हूँ के, हमारे वालिदों को संविधान के साथ रहना था इसलिये वों भारत मे रुके… उनको अगर इस्लाम के साथ जीना होता तो वों पाकिस्तान चले जाते. ये देश संविधान से चलता है और उसी क अंतर्गत बने गये कानून के तहत ही चलेगा. हमारे भारत देश मे  कही बार समाज मे चल रही कुरिती ओंकॊ समाप्त करने के लिये परिस्थिती के अनुरूप कानून बनाये गये है. भारत देश की सबसे बडी आबादी हिंदू समाज मे चल रही बाल विवाह की कुरिती समाप्त करने के लिये कानून बनाया गया… हिंदू समाज मे चल रही दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिये भी कानून बनाया घ्या, जिसे सारे हिंदू समाज ने स्वीकार कर लिया. ठीक उसी प्रकार मुस्लिम समाज मे चल रही इस ट्रिपल तलाक के कुरिती को समाप्त करने के लिये "ट्रिपल तलाक कानून" को बनाया गया है, जिसका भारत देश का सच्चा और देशभक्त मुसलमान खुले दिल से स्वागत करता है. आज का ये मुसलमान मुस्लिम समाज को डराकर और दबाकर अपनी धार्मिक दुकाने चलाने वाले कट्टर और गैर इस्लामिक लोगों के बहकावे मे अब नहीं आयेगा.


दोस्तो यह है भारत के देशभक्त मुसलमान कि विचारधारा. आप इस विषय के बारे मे क्या सोचते है यह आप हमे नीचे दिये गये कंमेंट बॉक्स मे जरूर बतायें...

जय हिंद..... जय भारत.....


       

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